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गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011

माँ का अपराधी

माँ
जब-जब तुम
मेरे सिर पर हाथ फेरती हो
मैं
तुम्हारा अपराधी बन जाता हूँ
क्योंकि
सिर पर हाथ फेरते समय
तुम्हारे मन में
मेरे लिए
एक डर होता है
और
मैं तुम्हें
डराना नहीं चाहता।

गीला, सिकुड़ा आँचल

माँ
तुम्हारे आँचल में सिकुड़न है
माँ
तुम्हारा आँचल गीला भी है
मैं समझ गया माँ
मैं रात भर
चैन से सोता रहा
और तुम
मुझे देख-देख कर
रोती हुई
मेरे लिए
रात भर हसीन सपने बुनती रहीं
तुम्हारे रोदन से
मैं कहीं जाग न जाऊं
इसलिए
तुमने मुँह में
कपड़ा ठूंस लिया होगा
तभी तो
तुम्हारा आँचल सिकुड़ा और
गीला हुआ होगा।

माँ की उम्मीद

सुबह आठ बजे
ड्यूटी पर जाते समय
माँ
द्वार तक छोड़ने आती है
और
वह जानती है
कि
अब मैं शाम को
पाँच बजे ही घर आऊंगा
लेकिन
फिर भी वह
मेरे जाते ही
उम्मीद लगाती है
कि
मैं बस
आने ही वाला हूँ
उसे कोई समझा भी नहीं सकता
क्योंकि
वह माँ है।

वह माँ है

मैं
अब कमाने लगा हूँ
फिर भी
वह
कुछ रूपये दे देती है मुझे
चिन्ता है उसे
वो माँ है न।

माँ की याद

जब भी
मैं घर से निकलता हूँ
माँ
करती है चिन्ता
और
लाद देती है
ढेरों सामान
फिर भी न जाने
क्यों लगता है
कि
घर पर कुछ छोड़ आया हूँ
हाँ
याद आया
माँ को छोड़ आया हूँ।

माँ की खातिर

गरीब माँ
होंसलों के पेड़ में
धैर्य के फल पकाती है
और
भूखे बच्चों की तसल्ली के लिए
पतीले में पत्थर उबालती है
चूल्हे में जलती
लकड़ी की तरह
माँ का दिल न जले
इसलिए
समझदार बच्चे भी
माँ की खातिर
झूठ-मूठ सो जाते हैं
इस तरह
माँ और बच्चे
एक-दूसरे की खातिर
सारा जीवन गुजार देते हैं।

अनमोल खत

ढेरों
खतों के बीच
एक बार में ही
पहचान लेता हूँ मैं
अपना
वह अनमोल खत
क्योंकि
उस खत के अंत में
लिखा होता है
तुम्हारी माँ।

आखिरी निवाला

माँ
माँ होती है
पुत्र
पुत्र होता है
माँ के हाथ से
पहले निवाले में ही
पुत्र का पेट भर जाता है
और
माँ है कि मानती ही नहीं है
क्योंकि
उसका हर निवाला
आखिरी निवाला होता है।

माँ का आशीर्वाद

ज्योतिषी ने कहा
दुर्घटना का योग है
घर से नहीं निकलना
फिर भी
मैं
निडर होकर निकला
विश्वास है मुझे
कुछ नहीं होगा
क्योंकि
माँ का आशीर्वाद मेरे साथ है।

माँ से बड़ा

माँ
नहीं मिली मुझे
तुम्हारे लिए कोई उपमा
नहीं बांध सका कोई
तुम्हें शब्दों में
तम्हीं बताओ
यदि कोई हो
माँ से बड़ी कोई उपमा
माँ से बड़ा कोई शब्द।