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शनिवार, 30 अप्रैल 2011

कुछ त्रिपदा अगीत....डा श्याम गुप्त

( त्रिपदा अगीत---अगीत विधा कविता का एक छंद  है--- तीन पंक्तियाँ , प्रत्येक में १६-१६ मात्राएँ , तुकांत बंधन नहीं )

मिटा सके भूखे की हसरत,
दो रोटी भी उपलब्ध नहीं ;
क्या करोगे ढूंढ कर अमृत |

ज़िंदगी की डोर लम्बी है,
थामना भी आना चाहिए;
हंसाने का बहाना चाहिए |

बहस तत्व ज्ञान के लिए है,
 झगड़े मिटाने के लिए है;
न कि मारा मारी के लिए |

प्रीति-प्यार में नया नहीं कुछ ,
वही पुराना किस्सा यारो;
लगता शाश्वत नया नया सा |

कल तुमने जो हंसी हंसी में,
बातों बातों में कह डाला ;
अपना ही वो अफसाना था |

दीवान लिखना चाहते थे,
शोखियों पर आपकी हम तो;
अदाओं में उलझे रह गए |

गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011

कुकर

कुकर में
चावल चढाने के बाद
पतिदेव घंटों खड़े रहे
सीटी के इंतजार में अड़े रहे
मगर
सीटी नहीं आई
तभी
बाजार से उनकी पत्नी आई
पत्नी के आते ही
कुकर ने
तुरन्त सीटी बजाई
यह देख
पतिदेव गुस्से में बोले
आजकल के
लड़के तो लड़के
कमबख्त
कुकर भी
अपनी हरकतों से बाज नहीं आते हैं
पत्नी के आते ही
तुरन्त सीटी बजाते हैं ।

फिल्मों का असर

कमला ने
विमला से कहा
मुझे
फिल्म देखने से डर लगता है
सुना है
महिलाओं पर इसका
बुरा असर पड़ता है
क्योंकि
जब मैंने देखी थी फिल्म
“राम और श्याम”
मेरे होश उड़ गए
एक साथ
दो लड़के हो गए
सुनते ही विमला ने
कमला की बात को प्रमाणित करते हुए
अपनी चुप्पी तोड़ी
और
धीरे से बोली
मेरी तो मारी गई थी मती
मैंने भी देखकर फिल्म
“गंगा, यमुना और सरस्वती”
इस बात को परख लिया
क्योंकि
मुझे भी हुईं थीं
एक साथ तीन लड़कियाँ
यह सुनकर
पास खडी रानी
सुनाने लगी अपनी कहानी
और
मचाते हुए शोर
बोली
हाय राम
मेरा क्या होगा
मैंने तो देखी थी फिल्म
“अली बाबा और चालीस चोर” ।

घरेलू मंत्रीमंडल

नई बहू
जब ससुराल आई तो
सास फूली नहीं समाई
लेकिन
भविष्य में बहू हावी न हो
सोचकर सास घबराई
तो उसने
कूटनीति से काम लिया
भारतीय नेताओं को आदर्श मान लिया
और
बहू से कहा
सुनो स्नेहा
मेरे पास इस घर का वित्त मंत्रालय है
तुम्हारे ससुर ने गृह मंत्रालय चुना है
बेटी योजना मंत्री और
छोटा बेटा विदेश मंत्री बना है
तुम्हारे पति ने
खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री की भूमिका निभाई है
लेकिन
तुम कौन सा विभाग संभालोगी
अपनी योजना
अभी तक नहीं बताई है
तुम हमारी बहू हो
इसलिए
स्वयं अपना विभाग चुनो
हमने
यह अधिकार तुम्हें दिया है
चतुर बहु ने तुरन्त कहा
अब मंत्रीमंडल में कुछ नहीं बचा है
इसलिए
मैंने विपक्ष में बैठना पसंद किया है ।

चश्मा

प्रेमिका को पाने के लिए
प्रेमी ने कहा
प्रिय
तुम्हारे खूबसूरत चेहरे पर जो
माइनस फाइव का चश्मा लगता है
बिल्कुल नहीं जमता है
इसे लगाने से
तुम्हारी खूबसूरती भी
माइनस फाइव हो गई है
इसलिए
ऐसा करो
अपने जीवन से ही
चश्मे को माइनस करो
और
बिना चश्में के
कुछ नहीं दिखेगा
इस बात की चिन्ता मत करो
मैं तुम्हारे काम आऊँगा
जहाँ भी जाना होगा
हाथ पकड़कर ले जाऊँगा
प्रेमिका बोली
खबरदार
मैं हूँ
तुमसे ज्यादा समझदार
इडियट
नॉनसेन्स
कल से लगाऊँगी मैं
कॉन्टेक्ट लेन्स।

प्रिय हीरोइन

मैं और मेरी बीवी
देख रहे थे टी वी
टी वी देखने का कारण था यूँ
हमारा मनपसन्द कार्यक्रम
फिल्मों हस्तियों का आ रहा था इंटरव्यू
पत्नी के साथ हम भी ले रहे थे आनंद
संचालन कर रहे थे देवानंद
मंच पर
बलखाती हुई एक हसीना आई
आते ही मुस्कुराई
कोशिश करने पर भी
जब मैं उसे पहचान नहीं पाया
तो मैंने दिमाग पर जोर लगाया
पत्नी बोली
दिमाग पर इतना जोर डालने की
क्या है जरूरत
यह है आपकी प्रिय हीरोइन मल्लिका शेरावत
और
आपकी आँखें इसे
इसलिए नहीं पहिचान पाई हैं
क्योंकि
आज यह पूरे कपड़े पहनकर आई है।